चिंचवड़ में श्राविकारत्न राजुलमति माताजी ने त्यागी देह उत्कृष्ट समाधि को आचार्यश्री समय सागर जी से मिला निर्देशन सतना के सिद्धार्थ भैय्याजी से मिली संबोधनमयी प्रेरणा लगभग चार महीने से यम संलेखना के मार्ग पर रहीं अग्रसर चिंचवड़ में श्राविकारत्न राजुलमति माताजी की 16 मई को हुई समाधि समतापूर्वक समाधि के बाद 18 मई को हुई विनयांंजलि सभा देशभर के सकल जैन समाज ने माताजी को दी विनयांजलि दस प्रतिमाधारी राजुलमति माताजी को मिला कई संतों का संबोधन नांदगाव के सेठी परिवार के प्रांगण में लिया था जन्म गृहस्थ अवस्था में राजुलबाई के नाम से पुकारा जाता था
