Ashoknagar : 54 लाख का सालाना पैकेज ठुकरा कर संघ में सम्मिलित हुए पीयूष भैया | Jain Focus

24 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर पीयुष जैन बने बाल ब्रह्मचारी
निर्यापक मुनिपुंगवश्री के संघ में सम्मिलित हुए पीयूष भैया
माता पिता ने नम आंखों से अपने सपूत को किया मुनिवर के सुपुर्द
तीन साल से निरंतर संस्कार शिविर में सम्मिलित हो रहे थे भैया
एक महीने में नौकरी छोड़ सीधे पहुंचे अशोक नगर, लिया ब्रह्मचर्य व्रत

24 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर पीयूष जैन बने बाल ब्रह्मचारी

आधुनिक युग में जहां युवा भौतिक सुख-सुविधाओं और करियर की दौड़ में आगे बढ़ने की होड़ में रहते हैं, वहीं 24 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर पीयूष जैन ने एक अनोखा और प्रेरणादायी निर्णय लिया है। उन्होंने सांसारिक जीवन को त्यागकर बाल ब्रह्मचारी बनने का मार्ग अपनाया।

पीयूष जैन, जो एक प्रतिष्ठित कंपनी में कार्यरत थे, ने नौकरी और आधुनिक जीवन की व्यस्तता को छोड़कर अपने जीवन को आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित कर दिया। वे निर्यापक मुनिपुंगवश्री के संघ में सम्मिलित होकर साधना और संयम के पथ पर अग्रसर हुए।

इस अवसर पर उनके माता-पिता की आँखें नम हो गईं। हालांकि अपने बेटे से अलग होना भावनात्मक क्षण था, लेकिन उन्होंने गर्व से अपने सपूत को मुनिवर के सुपुर्द किया। माता-पिता ने कहा कि पीयूष का यह निर्णय केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बनेगा।

पीयूष भैया पिछले तीन वर्षों से लगातार संस्कार शिविरों में सम्मिलित हो रहे थे। इन शिविरों ने उनके जीवन में धार्मिक संस्कारों और संयम की गहरी छाप छोड़ी। यहीं से उनके मन में वैराग्य की भावना जागृत हुई, जिसने उन्हें ब्रह्मचर्य की ओर अग्रसर किया।

एक महीने पूर्व उन्होंने अपनी नौकरी को त्यागने का निर्णय लिया और सीधे अशोक नगर पहुँचे, जहाँ उन्होंने आध्यात्मिक वातावरण में ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया।

उनका यह कदम समाज के युवाओं के लिए एक जीवंत संदेश है कि जीवन का वास्तविक आनंद त्याग और संयम में है। आधुनिक शिक्षा और करियर के बीच भी यदि वैराग्य का दीप प्रज्वलित हो, तो इंसान संसार से ऊपर उठकर आत्मिक शांति और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर हो सकता है।

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