मुनिराज महावीर प्रभु का कुंडलपुर नगरी में हुआ आहार केवलज्ञान की प्राप्ति के बाद हुई समवशरण की रचना सौधर्म इंद्र सहित सकल समाज ने की केवल्यज्ञान की पूजन मीडिया प्रभारी दीपक राज जैन ने दी जानकार

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