आर्यिकावृंद और चतुर्विघ संघ इस काल और देश का सौभाग्य है आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी विशाल संघ के नायक हैं-प्राकृताचार्यश्री विशुद्धता के बल पर वह शुद्ध आत्मस्वरुप को उपलब्ध हों इंदौर के गोधा परिवार और समाज को बताया सौभाग्यशाली पट्टाचार्य महोत्सव के लिए आग्रह था, परंतु चाहकर भी न पहुंच सके
