Sagar News : मुनिपुंगवश्री ने सुनाया दीक्षा से पूर्व का संस्मरण | JAIN FOCUS मुझे जो भी मिला मांगने से नहीं, गुरु कृपा से मिला है जब आचार्यश्री से उत्सुकवश बोले थे कि अभी लंगोट उतार दूं.. आचार्यश्री ने मुनिपुंगवश्री से कहा था तुझे ही तीर्थ बना दूं तो जो बिना मांगे मिलता है वह दिन दोगुना रात चौगुना फलता है हम उनके चरणों में आ गए थे, अब फैसला गुरु के हाथ में था गुरु की प्रमाणिकता ही है कि जो भी बोलता हूँ वह प्रमाणिक होता है गुरु ने स्वयं ही कहा था कि अब तुम मुनि पद के योग्य हो उन्होने कितना आशीर्वाद दिया ये तो मुझे नहीं पता-मुनिपुंगव मेरी एक ही चाहत रही, मैं अपने गुरु को नमोस्तु अच्छी तरह करूं मेरा आशीर्वाद में नहीं, नमोस्तु करने में लक्ष्य था-मुनिपुंगव सुधा देशना मण्डपम से मुनिपुंगवश्री ने सुनाया संस्मरण
